Breaking News: शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ की उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई।
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मीडिया के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक बताए जा रहे चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या किए जाने से राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
घटना उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके की बताई जा रही है, जहां अज्ञात हमलावरों ने कथित तौर पर कार पर फायरिंग की। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौत हो गई, जबकि ड्राइवर घायल बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाइक सवार हमलावरों ने बेहद करीब से कई राउंड फायरिंग की। गंभीर रूप से घायल चंद्रनाथ रथ को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि चंद्रनाथ रथ पूर्व वायुसेना अधिकारी थे और बाद में भाजपा से जुड़कर शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगियों में शामिल हो गए थे।
शुभेंदु अधिकारी ने क्या आरोप लगाए?
शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना को “सुनियोजित हत्या” बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनके सहयोगियों की पिछले कुछ दिनों से निगरानी की जा रही थी।
हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि हत्या के पीछे राजनीतिक कारण या किसी विशेष व्यक्ति की भूमिका को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभिषेक बनर्जी का नाम क्यों चर्चा में?
कुछ भाजपा नेताओं ने राजनीतिक बयानबाजी के दौरान Abhishek Banerjee और कुछ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं।
लेकिन इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक आधिकारिक सबूत या जांच एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है।
वहीं All India Trinamool Congress ने घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर बढ़ी चिंता
राज्य के कई हिस्सों से हिंसा, आगजनी और झड़पों की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- कई जिलों में राजनीतिक टकराव की घटनाएं हुईं
- पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया
- कुछ इलाकों में केंद्रीय बलों और पुलिस पर हमले की भी खबरें आईं
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद बढ़ती हिंसा राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर राजनीतिक हिंसा रोकने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है।
जांच की मांग तेज
इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। भाजपा नेताओं ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है, जबकि राज्य सरकार की ओर से भी कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
