Breaking News: सोमनाथ पर पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाआरती कर दिया एकजुटता का संदेश!
Video Source: India TV News
मीडिया के अनुसार,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वर्ष 2026 में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और यह अवसर भारत की आस्था, संस्कृति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उस दौर में आक्रांताओं को लगा था कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर लहरा रही ध्वजा भारत की अटूट शक्ति का प्रमाण है।
????️ सोमनाथ मंदिर में पीएम मोदी ने की महाआरती, ऊँ जाप किया, त्रिशूल उठाया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की।
उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। इस दौरान महाआरती की गई, ऊँ का जाप हुआ और त्रिशूल धारण कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया गया।
सोमनाथ मंदिर पर वर्ष 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है।
“आतताइयों को लगा था वे जीत गए, लेकिन सोमनाथ आज भी खड़ा है” — पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा:
“1000 साल पहले जब सोमनाथ पर हमला हुआ, तब आतताइयों को लगा था कि वे जीत गए हैं। लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर लहरा रही ध्वजा बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है।”
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।
नेहरू का नाम लिए बिना पुनर्निर्माण विरोध का ज़िक्र
प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए उस दौर का उल्लेख किया जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली थी।
उन्होंने कहा कि उस समय भी पुनर्निर्माण को रोकने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि 1951 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी।
सद्भावना ग्राउंड में जनसभा — एकजुट रहने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर से करीब 3 किलोमीटर दूर सद्भावना ग्राउंड में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए कहा:
“हमें आज भी उन ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटने की कोशिश में लगी हुई हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत की विरासत पर गर्व करना हर देशवासी का कर्तव्य है।
पीएम मोदी के संबोधन की 4 बड़ी बातें
सोमनाथ का वजूद मिटाया नहीं जा सका
पीएम ने कहा कि 1026 में गजनवी ने मंदिर तोड़ा, लेकिन उसे यह भ्रम था कि सोमनाथ समाप्त हो गया। इसके बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण होता रहा। खिलजी के आक्रमण के बाद भी जूनागढ़ के राजाओं ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
न सोमनाथ नष्ट हुआ, न भारत
उन्होंने कहा कि सोमनाथ को नष्ट करने के कई प्रयास हुए, सदियों तक विदेशी आक्रांताओं ने भारत को मिटाने की कोशिश की, लेकिन न भारत मिटा और न सोमनाथ।
मजहबी कट्टरता कुछ नहीं बिगाड़ पाई
पीएम मोदी ने कहा कि आक्रांताओं को लगा कि उनकी तलवार सनातन को परास्त कर रही है, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ के नाम में ही सोम यानी अमृत जुड़ा है—जो अमरता का प्रतीक है।
आज भी विरोधी मानसिकता मौजूद
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त कुछ लोगों ने भारत की विरासत को भुलाने की कोशिश की। सोमनाथ के पुनर्निर्माण के समय भी ऐसे प्रयास हुए।
“विकसित भारत के लिए एकजुट रहना ज़रूरी”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा:
“हमें आज भी सावधान और एकजुट रहना है। ऐसी ताकतों से बचना है जो हमें बांटने की कोशिश करती हैं। आज हर देशवासी के मन में विकसित भारत को लेकर भरोसा है। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा। हम गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई जीतेंगे।”
